गुरु हमें किया देते हैं | Radha Soami Shabad

गुरु हमें किया देते हैं | Radha Soami Shabad

गुरु हमें किया देते हैं : Radha Soami Shabad

एक समय की बात है एक गाँव में एक बुढी औरत रहती थी जिस के पास कुछ गये थी | वो उन्ही गय का दूध बेच कर अपना जीवन यापन किया करती थी | एक दिन गाँव में एक संत आए जब ये बात उस बुढी औरत को पाता लगी तो वो भी उसके पास गयी और बोली महराज में अपने जीवन के आखरी पड़ाव में पहुंच गयी हूं|

ये देख कर महराज ने बोला अच्छा तब औरत ने बोला मेने अपने सम्पुण जीवन में किसी को अपना गुरु नहीं बनाया हैं और मेने सुना है की जो किसी को गुरु नहीं बनता है उसे संतोष प्राप्त नहीं होता है |




तब वो कहती है की महराज मुझे भी कोई गुरु मंत्र दे दीजिये जिस से मुझे भी संतोष की प्राप्ति हो जाए ताकि में अपने अगले जन्म को सुधारु और अपने जीवन में सुख सन्ति प्राप्त कर सकु ये बात सुन कर ना जाने महाराज को उस बुढी  महिला से ईशा होने लगी और सोचने लगे सारी उम्र भगवान की याद आयी नहीं और अब बड़ापे में भजन कीर्तन की याद आरही है |

महाराज ने सोचा ऐसे इंसान को तो कभी भी सन्ति नहीं मिलनी चहिये पर महराज ये बात सीधे उस महिला को बोल नहीं सकते थे तो फिर महराज को एक मजाक करने का मन हुआ | तब महराज ने कहा माता जी पूरी उम्र तो आपको भगवान की याद आयी नहीं आप को बस अपनी गय का दुध निकाल कर बेचने के ही काम में व्यस्त थी |

महराज ने कहा आप को सुख सन्ति प्राप्त करने का मंत्र यही है की आप वापस जा कर दुबारा अपना काम करो और जब भगवान की याद अये तो मंत्र के रूप में गय का सिंह नाम को मंत्र को तोर पर बोला करना |

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Radha Soami Shabad

जो झुक गया दिल से गुरु के सजदे में उसे मुक्ति का तोफा जरुर मिला

तब महिला ने सोच महराज सही बोल रहे है | महिला ने सोचा महराज बहुत ज्ञानी है और उन्होंने मेरे अनुसार ही मुझे मंत्र बताये है ताकि में काम करते करते भगवान को याद करू और अपने जीवन को सही मार्ग में लेकर जाऊ महिला इस मंत्र को पाकर बहुत खुश हुई और उसके पास जो भी था वो महराज को देकर घर लौट आयी |

महाराज भी कुछ दिन रुकने के बाद अपने आश्रम चले गए | अब उस महिला के हाथ मर तो जैसे स्वर्ग की चाभी लग गयी वो दिन-रात गय का सिंह नाम का जाप करने लगी तो उसका मन पूरी तरह से उस काम में रम गया | कुछ समय बाद वही संत उसी के पास वाले गाँव में आए जिस गाँव में वो बूढी महिला रहती थी |

जब महिला को पता लगा की पास के गाँव में उसके गुरूजी आए हैं तब वो अपना सब काम छोर कर महराज से मिलने जा पहुंची लेकिन वहाँ पहुचने के लिए दो गाँव के बीच में एक बहुत बड़ी नदी थी जिसे पार किये बिना एक गाँव से दुसरे गाँव नहीं जाया जा सकता था | जब की एक साल पहले ही दो गाँव को जोड़ने वाला पुल बाढ़ में टूट गया था |

पर जब महिला उस नदी के तट पर पहुँची तब वो उस नदी का बहाव देखकर वही खड़ी हो गयी पर जैसे ही उसको नदी के पार उसके गुरु दिखाई दिए वो भूल गयी की बीच में नदी भी है |

गुरु की महिमा निराली है | अज्ञानता को दुर करके ज्ञान की ज्योति जलाई है |

और उस नदी में पानी बह रहा है उसे अपने गुरूजी के मंत्र याद आए और वो बोलते हुए वो पानी पर चलने लगे जैसे कोई जमीन पर चलता है | ये देख कर जो संत थे वे बहुर आचर्य चकीत हुए की आखिर उस महिला ने पानी में चलने की सिधि कैसे प्राप्त कर ली पर जब वो महिला उनसे मिली तब उन्होंने उससे उस बारे में कोई चरचा नहीं की बल्कि यही दिखने की कोशिश की वो सब सख्ती उनके पास भी हैं |

तब जब वो महिला जाने लगी तो बोला गुरूजी आज दिन का भोजन आप मेरे यहाँ करने का पर्स्ताव स्वीकार करे तब गुरूजी ने बोला ठीक है आज तुम्हारे घर में जाकर ही भोजन करुगा | और जब महिला और गुरुजी भोजन के लिए जाने लगे तब वही विशाल नदी आयी पर महिला को तो अपने गुरुजी के मंत्र पे पूरा भरोसा था तो वो वही मंत्र बोलने लगी गय का सिंह मंत्र जाप कर नदी पार करने लगी और वो जो मंत्र देने वाले गुरुजी को हिमत माहि हो रही थी |

हिन्दू धर्म की ये मान्यता है की गुरु बिना ज्ञान नहीं मिल सकता और ज्ञान ही सफलता की कुंजी है | फिर ये फर्क  नहीं पढ़ता की वो ज्ञान अध्यात्मिक के लिए है या फिर भोतिक सफलता के लिए हैं |

लेकिन अगर आप लो सफल होना है तो आपको हमेशा गुरु की जरुरत है | यहाँ पर गुरु का मतलब उनसे है जो की आप को आपके समस्या के सामने समादान के रूप में मानसिक , आर्थिक या व्यचारिक किसी भी तोर पर मामूली सी मदत कर दे ना की धोती कुर्ता पहने वे किसी साधु से लेकिन गुरु वास्तव में देता किया है ?

Jai Radha Soami Shabad

अगर आप ध्यान दे तो गुरु एक विस्वास और अधिक बोले तो आत्म विस्वास देते है | बस गुरु इतना विस्वास देते है की आप जो भी कर रहे हों उसमे सफल हो सकते हों फिर सफल होने का सही राश्ता किया है फिर इस बात से फर्क ही नहीं पड़ता की वो रास्ता सही है या गलत है भी या नहीं यदि आप को अपने गुरु पर विस्वास है |

तब कियूँ  ना गुरु के दुवारा बताया रास्ता गलत ही कियूँ ना हो आप उससे भी सफल हो सकते हो कियूँ की सफल होने का तरीका उतना इम्पोर्टेन्ट नहीं होता जितना  सफल हो जाने का विशवास होता है |

दोस्तों अगर आप भी सफलता पाना चाहते हो तो किसी को अपना गुरु बनाये और उसके बताये दिशा में पुरी श्रध्दा  के साथ चले कियूँ की महत्वपूर्ण गुरु या उसके द्वारा बतया रास्ता नहीं है बल्कि महत्वपूर्ण  विस्वास है की गुरु द्वरा बताई दिशा में चल कर आप सफल हो जायेंगे और आप सच में सफल हो जायेंगे कियूँ की गुरु बस एक इशरा कर सकता है पर वो आप के साथ नहीं चल सकता |

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