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चार मोमबती की प्रेरणादायक कहानी 

रात का समय था हर तरफ

हाथी और रस्सी

एक व्यक्ति रस्ते से गुजर रहा था तभी उसने देखा की एक हाथी एक छोटे से लकड़ी के खूटे से बंधा खड़ा हुआ था | उसे ये देख कर बड़ी हेरानी हुई की इतना विशाल हाथी एक पतली रस्सी के सहारे उस लकड़ी के खूटे से बाँदा हुआ था | ये देख कर व्यक्ति  को आचार्य भी हुआ और हँसी भी आयी |

उस व्यक्ति  उस हाथी के मालिक से ये बात कही की ये हाथी इतना विशाल है, फिर भी इतनी पतली रस्सी और कुंटे से कियु बाँदा है ? ये चाहे तो एक झटके में  इस रासी को तोर सकता हैं , लेकिन ये फिर भी कियु बाँदा हुआ हैं  ?

हाथी के मालिक ने कहा श्रीमान जब ये छोटा था तब मेने इसी रस्सी से बाँदा था | उस समय इसने इस रस्सी और खूटे  तोरने की कोशिश की थी पर उस समय नाकाम था | कियूँ की उस समय ये बहुत छोटा था उस समय उस की हज़ार किशिश की थी पर नाकाम रहा था | तब हाथी को यह यकीन हो गया की ये रस्सी बहुत मजबूत है |

और ये इसे कभी नहीं तोर पायेगा इस तरह हाथी ने रस्सी तोरने की कोशिश खतम कर दी और आज ये हाथी इतना विशाल हो गया है पर आज भी इसके मन में यही विश्वास बना हुआ है की ये आज भी रस्सी को नहीं तोर पायेगा, इसी लिए ये इसे तोरने की कभी कोशिश भी नहीं करता है , और आज इतना विशाल होकर भी ये हाथी इतनी पतली रस्सी से बंधा हुआ है |

तो दोस्तों उस हाथी की तरह ही हम भी इंसानों में भी ऐसे विश्वास बन जाते है | जिनसे हम कभी पार नहीं हो पाते और एक बार असफल होने के बाद हम ये मन लेते है की अब हम सफल नहीं हो सकते और फिर हम कभी आगे बढ़ने की कोशिश नहीं करते है |

 

 

 

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