अकबर बीरबल की कहानियाँ | Short Akbar Birbal ki Kahani and short stories

Short Akbar Birbal ki Kahani and short stories: दोस्तों इस पोस्ट में आप अकबर और बीरबल की बहुत सी कहानियाँ पढ़ेंगे जो की आप जानते है की सम्राट अकबर के अजीब और ग़रीब सवाल और बीरबल के बड़ी बुद्धिमानी जवाब वाली कहानियाँ जिन्हे पढ़ने में बच्चो और बढ़ो दोनों को एक पेरणा और शिक्षा जरूर मिलती है !

बीरबल ने चोर को पकड़ा

 एक बार राजा अकबर के प्रदेश में चोरी हुई ! इस चोरी में एक चोर ने एक व्यापारी के घर से बहुत ही कीमती सामान चुरा लिया था ! उस व्यपारी को इस बात पर तो पूरा विश्वाश था ! की चोर उसी के 10 नौकरों में से एक था पर वह यह नहीं जनता था कि वह कौन हैं !

Short Akbar Birbal ki Kahani and short stories
    Short Akbar Birbal ki Kahani and short stories

यह जानने के लिए कि चोर कौन हैं ! वह व्यापारी बीरबल के पास गया और उसने बीरबल से मदद मांगी ! बीरबल ने भी इस बात पर हां कर दिया और अपने सिपाईयों से कहा कि सभी 10 नौकरों को कारागार/जेल में डाल दिया जाये ! यह सुनते ही उसी  सिपाईयों द्वारा सभी नौकरों को पकड़ लिया गया तब बीरबल ने सब से पूछा की चोरी किसने की है, परन्तु किसी ने भी मानने से इंकार कर दिया की चोरी उसने की हैं !

बीरबल ने थोड़ी देर सोचा और कुछ देर बाद वह दस सामान लम्बाई की छड़ी ले कर आये और सभी चुने हुए लोगों को एक-एक छड़ी पकड़ा दी ! पर छड़ी पकड़ते हुए बीरबल ने एक बात कही की उस इंसान की छड़ी दो इंच बढ़ी हो जाएगी जिस व्यक्ति ने यह चोरी  की हैं !

यह कह कर बीरबल चले गए और अपने सिपाईयों को निर्देश दिया की सुबह तक उनमें से किसी भी व्यक्ति को छोड़ा ना जाये ! जब बीरबल ने सुबह सभी नौकरों को छड़ी को दयान से देखा तो पता चला उनमें से एक नौकर की छड़ी २ इंच छोटी थी !

यह देखते ही बीरबल ने कहा यही व्यक्ति चोर हैं बाद में यह देखकर उस व्यपारी नें बीरबल से पूछा की कैसे उन्हें पता चला की चोर वही है ! बीरबल ने कहा की चोर ने अपनी छड़ी २ इंच बड़ी हो जाने के दर से रात के समय ही अपनी छड़ी को 2 इंच छोटा कर दिया था !

Short Akbar Birbal ki Kahani and short storiesसे शिक्षा: दोस्तों इस कहानी से हमे ये शिक्षा मिलती हैं की सत्य कभी नहीं छुपता इसलिए जीवन में कभी भी झूठ मत बोलो !

ऊँट की गर्दन क्यों मुड़ी हैं ?

अकबर बीरबल की हाज़िरी के बड़े कायल थे, एक दिन दरबार में खुश होकर उन्होंने बीरबल को कुछ पुरुस्कार देने की घोसणा की लेकिन बहुत दिन गुजरने के बाद भी बीरबल को धनराशि (पुरुष्कार ) प्राप्त नहीं हुआ इस बात से बीरबल बड़ी ही उलझन में थे कि महराज को याद दिलाया जाये तो कैसे ?

एक दिन महराज अकबर यमुना नदी के किनारे शाम कि सैर पर निकले, बीरबल उनके साथ था अकबर ने वहाँ एक ऊँट को घूमते देखा अकबर ने बीरबल से पूछा बताओं, ऊँट की गर्दन मुड़ी क्यों होती हैं !

बीरबल ने सोचा माहराज को उनका वादा याद दिलाने का यही समय हैं, उन्होंने जवाब दिया माहराज, कहते हैं कि जो भी अपना वादा भूल जाता है तो भगवान उनकी गर्दन ऊँट की तरह मोड़ देता हैं , यह एक तरह की सजा हैं !

तभी अकबर को याद आता है की वो भी तो बीरबल से किया अपना वादा भूल भूल गए हैं ! उन्होंने बीरबल से जल्दी से महल में चलने के लिए कहा और महल में पहुँचते ही सबसे पहले बीरबल को पुरुस्कार की धनराशि उसे सौंप दी, और बोले मेरी गर्दन तो ऊँट की तरह नहीं मुड़ेगी बीरबल और यह कहकर अकबर अपनी हँसी नहीं रोक पाए ! और इस तरह बीरबल ने बिना मांगे अपना पुरुस्कार राजा से प्राप्त कर लिया !

किसकी दाढ़ी की आग

बादशाह अकबर की यह आदत थी कि वह अपने दरबारियों से तरह-तरह के पर्सन किया करते थे ! एक दिन बादशाह  दरबारियों से पर्सन किया : अगर सबकी दाढ़ी में आग लग जाये, जिसमें में भी शामिल हूँ तो आप पहले किसकी दाढ़ी की आग बुझाओगे !

हुजूर की दाढ़ी की सभी सभासद एक साथ बोल पड़े ! मगर बीरबल  कहाँ : हुजूर सबसे पहले में अपनी दाढ़ी को आग भुजाऊंगा, फिर किसी और की दाढ़ी की और देखूँगा !

बीरबल के उत्तर से बादशाह बहुत खुश हुए और बोले : मुझे खुश करने के उदेश्य से आप सब लोग झूठ बोल रहे थे ! सच बात तो यह हैं कि हर आदमी  पहले अपने बारे में सोचता हैं !

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तेली और कसाई

एक दिन अकबर बादशाह दरबार में बैठे हुए थे ! उस वक़्त एक तेली और कसाई आपस में लड़ते-लड़ते वहाँ आए !

बीरबल ने पूछा : तुम दोनों में से शिकायत लेकर कौन आया हैं ?

तेली ने कहाँ : मैं प्रतिवादी हूँ !

बीरबल ने उन दोनों से लड़ाई का कारण पूछा तेली बोलै महराज में अपनी दुकान पर बैठा हुआ हिसाब लिख रहा था कि इतने में कसाई ने मेरे पास आकर तेल मांगा ! मैंने अपना काम छोड़कर इसको तेल दिया और फिर अपना काम करने लगा !

थोड़ी देर बाद आँख उठाकर देखता हूँ तो मेरे पैसों की थैली गायब हैं ! मुझको इस कसाई पर संदेह हुआ ! मैं उसी समय दौड़ता हुआ इसके पास गया और इसके पास वह थैली देखी ! परन्तु जब मैंने वह थैली मांगी तो इसने देने से इंकार कर दिया और कहा कि यह तो मेरी हैं !

सच-सच कहता हूँ इसमें कुछ भी झूठ नहीं है और परमेश्वर साक्षी है, अब तो आप न्याय करके मेरी थैली मुझको दिलवायें ! जब तेली अपना हाल सुना चुका, तब कसाई कहने लगा : हूजुर मैं अपनी दुकान पे बैठा हुआ बिक्री के पैसे गिन रहा था कि इतने में ही यह तेली रोज की तरह तेल बेचने आया और इसकी दुकान मेरे घर से चार-पांच घरों फसलें पर हैं !

जिस समय यह मेरे पास आया, उस वक़्त पैसों की थैली मेरे सामने राखी हुई थीं | इसके जाने बाद मैंने देखा तो थैली नहीं मिली ! मैंने दौड़कर इसे पकड़ लिया और अपनी थैली इससे छीन ली !

मैंने अपना हल सच-सच कहा है इसमें कुछ भी झूठ हो तो खुदा साक्षी है, सरकार हमारा न्याय कीजिये !

बीरबल ने दोनों की बातें सुनकर उनकों दूसरे दिन आने का हुक्म दिया और पैसों की थैली अपने पास रख ली ! उनके चले जाने के पश्चात बीरबल ने उस थैली में से पैसे निकाल कर धुलवाए तो उनमें तेल का अंश बिलकुल न दिखाई दिया बल्कि एक प्रकार की गंध आई, जिससे उसका निचय हो गया कि यह पैसे कसाई के हैं !

दूसरे दिन ठीक वक़्त पर दोनों आ पहुंचे बीरबल ने उन्हें अपना फैसला बता दिया तो तेली चीखने-चिल्लाने लगा ! पर जब बीरबल ने उसे कोड़े लगाने की आज्ञा दी तो वह अपना कसूर मान गया ! बीरबल ने थैली कसाई दे दी और तेली को उचित दंड देकर विदा किया !

 

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