ये 3 जिंदगी बदल ने वाली सच्ची कहानी | Real Life Inspirational Stories In Hindi

ये 3 जिंदगी बदल ने वाली सच्ची कहानी | Real Life Inspirational Stories In Hindi

ये 3 जिंदगी बदल ने वाली सच्ची कहानी | Real Life Inspirational Stories In Hindi

 Real Life Inspirational Stories In Hindi: नमस्कार दोस्तों आज कल आप देखते होंगे की आप के सामने सामने ऐसे इंसान होंगे जो कि आप से काम पढ़े लिखे होंगे पर पैसे कामने में वो आप से बहुत आगे होंगे |

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सुन्दर पिचाई (Sundar Pichai)

दोस्तों सुन्दर पिचाई को तो आप जानते ही होंगे अगर नहीं भी जानते है तो में आप को बताता हूँ, दोस्तों सुन्दर पिचाई एक एक ऐसे व्यक्ति है जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर वो सब पाया सो जो हर कोई सपने में सोचता है |

में आपको इसलिए ये बताने जा रहा हु क्योकि ये बिलकुल आम इंसान हैं जो की इस वक़्त google के CEO पद पर है | इन्होने अपनी जीवन की शुरुआत कड़ी मेहनत, लगन परिश्रम, और संगर्ष के साथ अपने जीवन की शुरुआत की थीं | और धीरे-धीरे सफलता की सीधी चढ़ाते गए |

ये अपनी मेहनत के जरिए सफलता के चरम तक पहुँच गए | इनको 10 अगस्त  2015  को Google के Chief Executive Officer(C.E.O) के रूप में चुना गया ये इन्टरनेट जगत की सबसे बड़ी कंपनी हैं |

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दोस्तों ये तो हुई इनकी बात पर में आपको इनके द्वारा बताया गयी कहानी शेयर करना चाऊंगा, एक बार  सुन्दर पिचाई एक रेस्टोरेंट में कॉफी पीने गए, पर जब वो वह कॉफी पी रहे थे तब उनके सामने एक घटना घटित हुई वो ये हुआ की उसी रेस्टोरेंट में एक महिला चीला रही थी की कॉकरोज-कॉकरोज और उनकी आवाज सुन कर रेस्टोरेंट का वेटर आया और उसने महिला को शांत कर कॉकरोज को उठा क्र बहार फेक दिया |

इस घटना को सुन्दर पिचाई बड़ी दयान से देख रहे थे | और सोच रहे थे की वो महिला कॉकरोज को देख कर इतना चीला रही थी, और उस वेटर ने आराम से उस कॉकरोज को उठा कर फेक दिया कैसे |

इस बात से उन्हें ये शिक्षा मिली की इंसान अपनी प्रॉब्लम का खुद ही जिम्मेदार होता है | अगर वो महिला में सयम रखती तो वो भी आराम से उस कठनाई से आराम से निकल सकती थी |

दोस्तों इस कहानी से हमे ये शिक्षा मिलता है की हमे कभी भी किसी भी कठनाई का सामना सयम रख कर करना चाइये |

माइकल डैल की सफलता की कहानी 

दोस्तों वो कहते हैं ना कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता | काम तो सिर्फ काम होता है, जिसे अगर लगन और मेहनत से किया जाये तो इंसान किया कुछ नहीं कर सकता |

तो ये कहानी है addidas or puma founder माइकल डैल की ये जीता जगता सबूत हैं | दोस्तों Adidas or Puma के ब्रांड को आज कौन नहीं जनता ये पूरी दुनिया में अपनी प्रोडक्ट quality और कम्फर्ट के लिए लोगों की पहली पसंद बना हुआ हैं | 

दोस्तों आप को जान कर हैरानी होगी की जिस  Adidas or Puma के ब्रांड के प्रोडक्ट के ऊपर आप आँख बंद कर विश्वास कर लेते लेते हैं | उसकी शुरुआत एक छोटी सी लॉन्डरी से हुई थी | 

और इसकी स्थपना जर्मनी के अडॉल्फ डेस्लर और रुडलॉफ डेस्लर ने की थीं, जिनका निक नाम एड़ी और रूडी था | दरअसल एड़ी और रूडी दोनों ही सेज भाई थे, और उनके पिता जर्मनी के एक छोटे शू फैक्ट्री में जूते सिलने का काम करते थे |

और उनकी माँ भी थोड़े एक्स्ट्रा  पैसों के लिए एक छोटे कमरे में लॉन्डरी चलाती थीं | एड़ी और रूडी अपनी शुरुआती पढ़ाई पुरी करने के बाद अपने पिता के साथ ही फैक्ट्री में काम करने लगे और फिर कुछ दिनों बाद विश्व युद्ध सुरु हो गया, जिसमे सभी युवा को शामिल होना जरुरी था |

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और जब एड़ी और रूडी दोनों को बुलाया गया, कुछ सालों तक चले वर्ल्ड वॉर को ख़तम होने के बाद दोनों सुरक्षित घर वापस आगये |

दोनों भाइयों को खेल में बड़ी दिलचस्पी थी और वो दोनों बेहतरीन खिलाडी भी थे | पर जब भी वे अपने पिता द्वारा सिले हुए जूते पहनते तो वो उन्हें कभी भी कम्फर्टेबले फील नहीं होते थे |

वे हमेशा सोचते थे की ऐसे जूते पहन कर कोई खेल कैसे सकता है ?  और इसी लिए उन्होंने अपने और अपने दोस्त के लिए जूते बनाने सुरु किये | और उन्होंने देखा की उनके द्वारा बनाये गए जूते लोगों को काफी पसंद आ रहे है | तो उन्होंने अपनी माँ की लॉन्डरी में ही जूते बनाने का फुल टाइम बिज़नेस शुरू कर दिया |

धीरे-धीरे उनके द्वारा बनाये गए जूते लोगों तक पहुंचने शुरू हो गए, फिर 1924 में दोनों ने मिलकर डास्लर brother नाम की एक कंपनी खोली, पर यहाँ भी उन्हें बहुत समस्या झलनी पड़ी |

क्योकि उनदिनों ज्यादा बिजली उपलब्ध नहीं होती थी और इस लिए उन्हें साईकल के पैदल का प्रयोग करना पड़ता था | और यही हुआ दोनों के साथ उनका business बढ़ता चला गया |

लेकिन उनके business को असली सफलता 12 साल बाद मिली, जब कैसे भी कर के अडोल्फ देसलर ने उस समय के स्टार इस्पिन्टर ओवेन्स को अपना जूता पहनकर खेलने को राजी कर लिया |

उस ओलंपिक में इस्पिन्टर ओवेन्स ने कुल चार गोल्ड मैडल भी जीते, इसके बाद से ही पूरी दुनियाँ के खिलाड़ियों के बीच डास्लर brother के जूते प्रसिद्ध होते चले गए | और फिर उनकी 1948 में इनकी कंपनी हर साल दो लाख जूते की बिक्री करने लगी |

दोस्तों इस कहानी से आप को पता लग गया होगा की अगर आप को लगता है की आप सही कर रहे है तो आप को जीवन में सफल होने से कोई नहीं रोक सकता |

आम इंसान की कहानी

एक बार एक आदमी संत के पास जाता है और अपनी प्रॉब्लम बताता है | वो संत से कहता है की संत जी मेरे ज़िन्दगी में कभी कोई ख़ुशी ही नहीं आती सोचा था जब नौकरी लगेंगी तब पिताजी को  कार गिफ़्ट करूँगा | 

पर ये भी न हो पाया नौकरी मिलने से पहले ही उनका देहांत हो गया,  सोचा था जब प्रमोसन होगा तब अपने बच्चों को कही घुमने लेकर जाऊंगा लेकिन प्रमोसन ही नहीं हुआ |

ऐसी बहुत सी खुशियाँ थी जिसका में इन्तज़ार करता रह गया और वो मुझे कभी मिली ही नहीं | उस आदमी ने संत से बोला मुझे समझ ही नहीं आता की मुझे मुझे कभी खुशियाँ मिलेंगी भी या नहीं संत ने उसकी बात दयान से सुनी उसके बाद संत उठे और उसको पास वाले बगीचे में ले गए |
उसने उस आदमी से कहाँ की लाइन से ये फूल देखते जाओ और जो सबसे सुन्दर फूल लगे उसे तौर लेना हा पर एक बात याद रखना जिस फूल से एक बार आगे निकल गए दुबारा उसपे वापिस नहीं आ सकते, और तुम्हे फूल लेकर आना भी जरुरी है |

वो आदमी चलता गया कहीं उसे बड़े फूल दिखते तो कभी छोटे फूल पर वो हर फूल को इस लिये छोड़ देता देता और सोचता कही इसे सुंदर फूल आगे हुए तो पर जब वो उस लाइन के अखरी तक पहुंचा तब उसने  देखा आगे तो बस मुरझाहे हुऐ से बस थोड़े से फूल बच्चे हैं | और उनमें से जो सबसे खिला हुआ फूल था वो आदमी उसे तोड़ कर ले गया |

जब वह संत के पास पहुंचा तो बोला संत जी राश्ते में मुझे बहुत छोटे और बड़े फूल देखे पर में इसी आस में आगे चलता गया की कोई अच्छा फूल मिल जायेगा, मै आगे चलता गया पर लास्ट में सुखे फूल ही बच्चे थे |

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तब में उसी में से जो सबसे ज्यादा खिला था उसे तोड़ के ले आया तब संत मुस्कुराएँ और बोले बस ये समज को ये गार्डन तुम्हारी ज़िंदगी है, और ये छोटे बड़े फूल तुम्हारी ज़िंदगी की खुशियाँ जैसे तुम ये सोच आगे चलते गए ये सोच कर की कोई अच्छा फूल मिल जायेगा बाकी सब फूलों की खूबसूरती को नज़र अंदाज करते गए |

ठीक उसी प्रकार ज़िन्दगी की छोटी-छोटी खुशियों को हम नज़र अंदाज़ करते जाते है एक बड़ी खुशी की तलाश में और जब तक ये समाज आता हैं ज़िंदगी निकल जाती है |

ये 3 जिंदगी बदल ने वाली सच्ची कहानी | Real Life Inspirational Stories In Hindi कहानियाँ आप को कैसी लगी हमे कम्मेंट कर बताये | 

 

 

 

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