गुरु हमारे अन्दर तक देख लेते है | Radha sowami knows all things

गुरु हमारे अन्दर तक देख लेते है | Radha sowami knows all things

गुरु हमारे अन्दर तक देख लेते है | Radha sowami knows all things

एक समय की बात है|  बाबा जयमत सिंह महराज ने गरुग्रांत में  sowami mahraj ji  के नाम के बारे में पढ़ा था और वो उस नाम की खोज में निकाल पढ़े पर जब वो sowami ji mahraj के दरबार में पहुंचे तो वहा सत्संघ चल रहा था | उन्होंने वह बैठ कर बाबा जी का सत्संघ ध्यानपूर्वक सुना | सत्संघ सुन कर उन्हें तसली हो गयी की sowami mahraj ही उन्हें उनकी मंजिल तक ले जा सकते है|





जयमत सिंह को पूरा विश्वास हो गया था की sowami maharaj ही वो इंसान है | जो वो नाम दे सकते है जिसका जिक्र उन्होंने गरुग्रांत में पढ़ा है| जयमत सिंह सत्संघ में तो जाते थे पर कभी नाम दान का गुण गान नहीं किया | उनके मन में एक ही सवाल रहता था स्वामी जी महराज एक हिन्दू परिवार से है |

जब की वो खुद एक सिख और Gurugaranth Saheb सिखों का है | और स्वामी महराज जी Gurugaranth Saheb से  वाणी ले कर सत्संग फरमाते है और वो एक हिन्दू है , और बाबा जय मत जी एक सिख तो वो एक हिन्दू से नाम दान कैसे के सकते है | जब की औधे में सिख बड़ा होना चाइये |

 

ऐसे विचार बाबा जयमत सिंह जी के मन में चल रहे थे | फिर खुद ही sowami mahraj जी ने बाबा जयमत सिंह जी से कहा अभी तक जात पात में ही लगे रहोंगे या नाम दान की याचना भी करोगे बाबा महराज जी के ये कथन सुन कर जयमत सिंह दंग रह गए |

 

तो दोस्तों आप सोच रहे होंगे की sowami mahraj जी  को  कैसे पता चला की जयमत सिंह जी के मन में किया चल रहा है | तो दोस्तों संतों को पता चल जाता है की शिष्यों के मन किया चल रहा है | ऐसा दिखाई देता है जैसे किसी कांच की बोतल के अन्दर पानी हो फिर बाबा जयमत सिंह जी सब समज गए|

तब तोरी देर सोचने के बाद बाबा जयमत सिंह जी ने sowami mahraj जी से नाम दान लिया और खुद भी एक संत सतगुरु बने तो दोस्तों संतों को हमारे अन्दर के सभी गुण और अवगुण साफ नज़र आते है, अगर वो हमसे परीक्षा ले तो sahyad ही कोई पास हो | हम आज भी जात पात के banndan में बंधे हुए है |

कभी कभी हम से निचले औधे का इंसान भी बहुत ऊचे विचार वाला होता है जात पात तो हमने बनायीं है मालिक ने तो बस जीव बनाये है | 

निर्षक : तो दोस्तों इस कहानी में यही बताया गया है की जो गुरु होता है| उनके जो भी शिष्य होते है और जो भी उन शिष्यों के मन में चल रहा होता है वो गुरु को सब पता होता है या कह सकते है साफ साफ दिखता है जैसे कांच की बोतल में पानी दोस्तों जो शिष्य होता है वो कभी बजी अपने गुरु से कुछ भी छुपा नहीं सकता है|

गुरु हमेशा शिष्य के मन की भुझ लेते है | दोस्तों हमे यहाँ भी शिक्षा मिलती है की हमे जात पात के बारे ममे नहीं सोचना चाइये और मालिक ने तो सारे जीव को एक सामान बनाया है तो हमे किसी से भेद भाव नहीं करना चाइये|

गुरु हमारे अन्दर तक देख लेते है Radha sowami knows all things
गुरु हमारे अन्दर तक देख लेते है Radha sowami knows all things

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