माँ की उदारता कोई बता नहीं सकता |

माँ की उदारता कोई बता नहीं सकता

Mother’s generosity can not tell: मेरी माँ उनकी बस एक आँख थी | मै उनसे बहुत नफरत करता था , हम अकेले थे! मेरे पिता नहीं थे | वो हम दोनों के गुजरे के लिए बहुत मेहनत करती थी, शिक्षक और छात्र के लिए खाना बनती थीं |

 

एक बार जब में स्कूल में था. तो मेरी माँ मुझसे मिलने आई, मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा था | वो मेरे साथ ऐसा क्र कैसे सकती थीं | जबकि उन्हें पता था की उनके कारण मेरे सहपाठी मुझे चिढ़ाते थे, एक ने तो मुझे कहा भी अरे तुम्हारी माँ की तो बस एक आँख हैं |

मुझे बहुत धक्का लगा, बहुत ही बेकार लगा, इतना अपमान जो मुझे सहना पड़ा था, मेरी माँ की वजह से, मै तो बस चाहता था की मेरी माँ कही गायब हो जाए | एक बार तो मैने उनसे कहा भी की अगर आप पुरे जगत के लिए मुझे बस एक हसने लायक पात्र बनाना चाहती हैं | तो आप मर ही जाओ |

मेरी माँ ने कुछ भी नहीं कहा… और मैने भी उस बारे में नहीं सोचा, मै गुस्से से भरा हुआ था. बस उनसे दूर होना चाहता था, किसी भी हालत में बस उनसे अलग, इसलिए मैने बहुत पढ़ाई की, बहुत मेहनत की, और एक अच्छी नौकरी हासिल कर ली, मैने माँ से कहा की मै अब उनके साथ नहीं रहना चाहता हूँ और मैं जा रहा हूँ |

कुछ सालो बाद मेरी शादी हो गयी, मैंने माँ  बताया, न ही बुलाया, मेरे बच्चे हुए, मै अपना खुद का घर खरीदा, मेरी ज़िन्दगी अच्छी हो चली थी | फिर एक दिन मेरी माँ मुझसे मिलने आई, मेरे बच्चे उन्हें देख डर गए, और फिर उन्हें देख कर हसने लगे, मुझे उनका चेहरा देख कर कोई खुशी नहीं हुई |

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यहाँ तक की मैने उन्हें अंदर भी नहीं बुलया, मैने उन्हें बहार से ही भगा दिया | और मेरी माँ ने धीरे से कहा की माफ़ कीजिये सायद गलत घर मैं आ गयी हूँ | और वो चली गयी, एक दिन मुझे पात्र आया, मेरे स्कूल का रीयूनियन होने वाला था, मै बहुत खुश था, मै बहुत खुश हुआ की अपने शहर जाकर दोस्तों से मिलूंगा रीयूनियन के बाद में उस पुराने घर गया, ऐसे ही पाता नहीं क्यों, बस चला गया, वह जाकर मुझे पता चला की मेरी माँ मर गयी हैं |

मुझे तो बिलकुल भी दुःख नहीं हुआ, न ही आँसू निकला आँखों से, उन्होंने मुझे एक पात्र दिया, जो मेरी माँ मुझे देना चाहती थी, पर दे नहीं पायी मेरे प्यारे बेटे |

मैं हमेशा तुम्हारे बारे में ही सोचती रहती हूं, तुम्हारी बहुत याद आती हैं बेटा, मुझसे एक बार मिलने आओ न, मै माफ़ी चाहती हूँ की मैने तुम्हारे घर आकर तुम्हारे बच्चे को डरा दिया, और तुम्हे परेशान किया, मुझे पाता लगा है की तुम यहाँ आने वाले हो, पर मेरी हालत ऐसी है की में बिस्तर से भी उठ नहीं सकती हूँ |

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बीमार रहती हूँ | मै माफ़ी चाहती हूँ की बचपन से आजतक तुम्हारे लिए परेशानी रही | तुम्हरा मज़ाक बना मेरी वजह से |

तुम जानते हो, जब तुम छोटे थे तो एक एक्सीडेंट में तुम्हारे पिता की मौत हो गयी, और तुम्हारी एक आँख चली गयी, मैं एक माँ हूँ बेटा, तुम्हे, अपने बच्चे को एक आँख के साथ बड़े होते हुए कैसे देखती भला, इसलिए मैने अपनी एक आँख तुम्हे, दे दी, और मुझे तुम पर बहुत गर्व है, की बेटा की तुम पूरी दुनिया को मेरी आँख से देख रहे हो, या युं कहूँ की मेरे लिए इस पुरे जहाँ को देख रहे हो…

मुझे मिलने आना बेटा… बहुत बहुत प्यार तुम्हारी माँ |

MORAL : दोस्तों इस कहानी से हमे ये शिक्षा मिलती है की माँ अपनी जान दे सकती है पर अपने बच्चों पर कभी कोई तकलीफ नहीं आने दे सकती है |

माँ की उदारता कोई बता नहीं सकता | Mother’s generosity can not tell कहानी आप को कैसी लगी हमे कम्मेंट क्र बतये | 

 

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