अहँकार कैसे खतम करे | How To Remove Ego |RSSB

अहँकार कैसे खतम करे | How To Remove Ego |RSSB

अहँकार कैसे खतम करे | How To Remove Ego|RSSB: एक समय की बात है अशोक सम्राट के गाँव में एक भीखारी आया करता था | एक दिन की बात है,  जैसे वो  भीखारी गाँव में आया और अशोक सम्राट की नजर उस भीखारी पर पढ़ी अशोक सम्राट सीधे उसके चरणों में जा कर गिर गया | जो की भीखारी को बिलकुल भी अच्चा नहीं लगा उसने सोचा  अशोक जैसा सम्राट गाँव में भीख मांगते एक भीखारी के पैर में सिर रख रहा  है |

ये सीन अशोक सम्राट के वजीर को बिलकुल भी अच्छा नहीं लगा और वह जैसे राज महल लोटे वजीर ने अशोक सम्राट से कहा,  ये किया अच्छा लगता है? अशोक जैसा सम्राट गाँव में एक भीखारी के पैर पकड़ रहा है |

वजीर ने अशोक सम्राट से महराज ये मुझे बिलकुल भी सही नहीं लगा की आप जैसा सम्राट जिसकी कीर्ति इतनी महत्वपूर्ण है  मुझे नहीं लगता जगत में इतनी कीर्ति रखने वाला एक सिंपल से भीखारी के पैर में सिर रख रहा  है |

अशोक सम्राट Hashne लगा और छुप रह गया | महीने दो महीने बाद उसने वजीर को बुलाया और बोला की एक काम करना है या उपाय करना है वजीर ने कहा काम किया है ?

अशोक सम्राट ने कहा तुम ये जो सामान सामने रखा है ले जाओ और गाँव में बेच कर आओ, सामान बड़ा अजीब था उसमे बकरी का सिर था, गय का सिर था, आदमी का सिर था और कई जानवरों के सर रखे हुए थे | अशोक सम्राट ने कहा की जाओ और बेच कर आओ बाजार में वजीर ने कहा जी महाराज ठीक है |

अब हुआ किया जब वो गाँव में सिर बेच रहा था तो उसका गय का सर , घोरे का सिर और बकरी का सिर मतलब सारे जानवर के सिर बिक गए बस आदमी का सिर नहीं बिका पाया वजीर थक गया पर किसी ने मनुष्य का सिर नहीं खरीदा कोई इस गंदगी को ले जाने को तयार नहीं था|

तब वजीर सोच रहा था की इस गंदगी को कोन लेकर जायेगा और कोन इस कोपरी को रखेगा| वजीर वापस महल में लोट आया और अशोक सम्राट के पास जाकर कहने लगा महराज बढ़े आचार्य की बात है सब सिर बिक गए बस आदमी का सिर नहीं बिक सका कोई नहीं लेता है | ये बात सुन कर सम्राट ने कहा मुफ्त में दे आओ, वजीर वापिस गाँव में गया और कई लोगो के घर गया की मुफ्त में ले लो इसे कोई तयार नहीं हुआ और लोगो ने वजीर को कहा पागल हो गए हो किया ?




गाँव के लोगो ने कहा हम मुफ्त में ले भी लेंगे तो इसे फेकने की मेहनत कोन करेगा यह बात सुन कर वजीर वापस महल में आगया और कहने लगा महराज इसे तो कोई मुफ्त में भी नहीं लेता है |

ये बात सुन कर महराज ने कहा अगर में मर जाऊ और तुम मेरे सिर को बाज़ार में बेचने जाओ तो कुछ फरक पढ़ेगा किया ? वजीर थोरा डरा और बोला मुझे किया मालूम शमां करे अगर आप  पूछते है तो में ये भी कह सकता हु की आप के सिर को भी कोई नहीं लेगा |

वजीर ने कहा आज पहली बार पता चला है की आदमी के सिर की तो कोई कीमत ही नहीं है | तब अशोक सम्राट ने वजीर को कहा इस बिना कीमत के सिर को मेने एक भीखारी के पैर में रख दिया तो कियूँ इतना परेशान होते हो |

जब आदमी के सिर की कीमत कुछ भी नहीं है फिर कियूँ उस दिन परेशान हो गए थे तुम जब की इन्सान के सिर की तो कोई कीमत है ही नहीं | जब आदमी के सिर की कीमत नहीं मतलब इन्सान के अहंकार की कोई कीमत नहीं है |

तो दोस्तों आप  को इस कहानी से एक अच्छी शिक्षा मिली होगी मेरे कहने का मतलब बस यही है | रजा हो या रंक मरने के बाद सभी को मटी में ही मिल जाना है | तो दोस्तों अहंकार किस बात पर करे सब की मदत हमे करनी चयिए|

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