प्रेम कैसा होना चहिये | Radha sowami sakhi in Hindi

प्रेम कैसा होना चहिये | Radha sowami sakhi in Hindi

प्रेम कैसा होना चहिये

Radha sowami sakhi in Hindi

दोस्तों आज हम जो बताने जा रहे है| वो प्रेम के बारे में है , की प्रेम रियल में होता किया है ?

Questions : बाबा से लड़के ने कहा की जब में प्रेंम से भर कर |  किसी से मिलना चाहता हूं, तो वाह दूसरा डर जाता है | और मै पीछे हट जाता हूं तो मुझे ये बताये की ऐसे समय में मुझे किया करना चहिये?

Answer : तो दोस्तों जो इसका उत्तर है, वो यह है की प्रेंम बहुत नाजुक बात है, प्रेंम को अगर सही तरीके से समझा जाये तो इसमें यहाँ बात निकाल कर आती है, की हमे अपने से ज्यादा दुसरे की मर्यादा का ख्याल रखना पढ़ता है|

प्रेंम का मतलब ही यही होता है की | किसी दुसरे का ख्याल रखना, तुम किसी के गले लगना चाहते हो मगर कोई दूसरा लगना चाहता है या नहीं यह काफी नहीं है, की तुम गले लगना चाहते हो, अच्छा है की तुम्हारे मन में गले लगने का ख्याल आया, आप को सुक्रिया करना चहिये भगवान का की आप के मन में ख्याल आया गले लगने का|




आभारी बनो परभु के लेकिन इतने से जरुरी नहीं की दुसरे को तुम्हारे से गले लगना ही परेगा तब तो वह पर प्रेंम ना हुआ अगर आप ऐसा करते हो तो इसका मतलब यहाँ है की तुमने दुसरे के साथ जबरदस्ती की है |

अगर आप ऐसा करते हो तो इसको प्रेंम नहीं हिंसा कहते है, प्रेंम नहीं कियु की प्रेंम तो फुक फुक के चलता है|

इस बात को जो ये पढ़ रहे है इस पर अमल जरुर करे कियु की जब आप प्रेंम कर रहे है तो आप का प्रेंम कैसा होना चहिये?

प्रेंम तभी होगा जब हम किसी दुसरे के कम्फर्ट होने का ख्याल रखते है, की दूसरा जाना हमारे साथ कम्फर्ट है या नहीं, कही वो अपनी आप को अकेला फील कर रहा तो नहीं ?

प्रेंम तो रती रती संभल कर चलता है, प्रेंम तो देखता है की दूसरा कितनी दूर तक चलने के लिए राजी है| प्रेंम एक इंच ज्यादा नहीं चलता है कियु की प्रेंम का अर्थ ही यही है, की तुम्हें दुसरे का ख्याल आया, दुसरे का मूल्य, दूसरा साध्य है,सादन नहीं है, आप उसे गले लगाना चाहते हो पर दूसरा लगना चाहता है या नहीं यह देख कर कदम उठना और धीरे धीरे उठाना नहीं तो वो जो दूसरा है वो घबरा ही जायेगा|

अगर आप ने ऐशा किया तो आप का प्रेंम आक्रमण जैसा लगेगा, तुमने दुसरे की चिन्ता भी नहीं की आप उस से पूछ लेते की में पास अता हूं, आ सकता हूं या नहीं, प्रेंम सदा द्वार पर दस्तक देता है और पूछता है की में अन्दर आ सकता हूं|

अगर जवाब ना में आए तो नाराज नहीं होता बल्की पर्तीक्षा करता है, नाराज नहीं हो जाता है कियु की ये दुसरे का अधिकार है, की वो कब तुम्हारे गले लगे और कब नहीं लगे, तुमे  प्रेंम का महसुश हुआ है उसे तो नहीं हुआ है ना |

माना तुम्हारे अन्दर प्रेंम का पनप गया है पर उसे तो इसके बारे में नहीं पता है| और वो आदमी प्रेंम के नाम पर इतने धोखे ले चूका है उसे किया पता फिर कोई नया Dahokha नहीं पैदा हो रहा |

प्रेंम के नाम पर ही लोगो को सताया गया है इस लिए लोग सकुच गए है| माँ ने किया प्रेंम, बाप ने किया प्रेंम, भाई ने किया प्रेंम, पत्नी ने किया प्रेंम, बहन ने किया प्रेंम, दोस्तों ने किया प्रेंम और सभी ने प्रेंम के नाम पर फायदा उठाया, और सभी ने प्रेंम के नाम तुम्हारी छाती पर पत्थर रखे बहाना प्रेंम का था और काम कुछ और लिया गया| जिसने भी कहा मुझे तुमसे प्रेंम है उसी से तुम डरने लगे कियु की अब कुछ और होगा | और इस प्रेंम के पाछे छुपा हुआ कोई रोग होगा |

शिक्षा: तो दोस्तों हमें इस कहनी से यहाँ शिक्षा मिलती है की अगर हमें किसी से प्रेंम होता है तो चाहे वो प्रेंम दोस्त से है, माँ से है, या फिर बहन से है| कहने का मतलब है किसी से भी हो पर उस प्रेंम की परिभषा किया होनी चाइये, परें किसी को डरा के या फिर किसी पर जबरदस्ती तोप नहीं सकते हो|

आप को हमेसा यहाँ चीज देखनी पढेगी की सामने वाला राजी भी है या नहीं है | तो में तो यही कहना कहूँगा की जिसे आप प्यार करते है, उसकी मर्जी को जरुर जाने, की वो किया चाहते है | और अगर ऐसा नहीं है और आप बस अपने बारे में सोचते है तो वो प्रेंम नहीं है |

प्रेम कैसा होना चहिये Radha sowami sakhi in Hindi
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