बेटियाँ हमारे लिए कितनी जरुरी है |How important daughters are to us

बेटियाँ हमारे लिए कितनी जरुरी है |How important daughters are to us

How important daughters are to us

एक गरीब परिवार में एक सुंदर सी बेटी ने जनम लिया और उस लड़की का बाप दुखी हो गया | और सोचता है की अगर बेटा पैदा होता तो कम से कम काम में तो हाथ बटता उसने बेटी को पला तो जरुर पर दिल से नहीं, और जब वो पढ़ने जाती थी कभी उसकी फीस टाइम में जमा नहीं करता था|

वह नाही उसकी कॉपी किताब पर ध्यान देता बस दारू पी कर घर में कोहराम मचाता रहता था| पर उसकी माँ बहुत अच्छी और भोली बहली थी वह अपनी बेटी को बढ़े प्यार से रखती थी | और अपने पति से छुपा छुपा कर बेटी की फीस जमा करती थी और कॉपी किताब का खर्चा देती थी और अपना पेट काट कर फठे पुराने कपरे पहन कर गुजरा कर लेती थी| मगर बेटी का पूरा ख्याल रखती थी|

उसका पति घर से कई दिनों के लिए घर से गायब हो जाता था और जितना कमाता था दारू में ही खर्च कर देता था| वक्त का पिहिया गुमता चला गया बेटी धीरे धीरे समजदार हो गयी और दसवी क्लास में उसका एडमिशन होना था | पर माँ के पास इतने पैसे ना थे की बेटी का स्कूल में एडमिशन करा पाती बेटी डरते हुए अपने पापा से बोली की पापा में पढ़ना चाहती हु और आप मेरा हाईस्कूल में एडमिशन करा दीजिये मामी के पास इतने पैसे नहीं है| बेटी की बात सुनते ही बाप आग बबुला हो गया| और चिलाने लगा बोला तू कितनी भी पढ़ लिख जा किया करेगी पढ़ लिख कर तुजे तो चूल्हा चोखा ही तो करना है|





उस दिन उसके पापा ने घर में आतंक मचाया और घर में सब को मारा पीता और उसका यहाँ व्यहवार देख कर बेटी ने मन ही मन सोच लिया की अब वह आगे की पढाई नहीं करेगी| फिर एक दिन उसकी माँ बाजार गयी बेटी ने पूछा माँ कहा गयी थी पर माँ ने उसकी बात को अनसुना कर कहा की में तेरा कल स्कूल में एडमिशन करूंगी| पर बेटी ने कहा नहीं माँ अब में नहीं पढूंगी मेरी वजह से तुमे कितनी परेशनी उठानी परती है और पाप भी तुमको मरते है यह कहते कहते रोने लगी और माँ में उसे सीने से लगते हुए बोला की में बाजार से कुछ रुपये लेकर आयी हु में करुँगी तेरा दाखिला बेटी ने माँ की तरफ देखते हुए पूछा की माँ इतने पैसे कहा से लायी हो|

माँ ने एक बार फिर उस की बात को अनसुना कर दिया और बहुत मेहनत कर बेटी का पढ़ाया लिखाया बेटी ने भी माँ की मेहनात देख कर दिल लगा कर पढाई की और इधर बाप दारू पी पी कर बीमार पर गया | डाक्टर के पास ले गए डॉक्टर ने कहा इनको TB है एक दिन तबियात ज्यादा ख़राब होने पर उसे हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया जब दो दिन बाद उसे होश आया तो डॉक्टरनी का चेहरा देख कर उसके होश उड़ गए और वो डॉक्टरनी कोई और नहीं खुद उसकी बेटी थी|

तब शर्म से पानी पानी होकर बाप रोने लगा और अपना मूह कपढ़े से दखने लगा और हाथ जोर कर बोला बेटी मुझे माफ़ कर दे में तुजे समज नहीं पाया दोस्तों बेटी आखिर बेटी होती है| बाप को रोते देख बेटी ने अपने बाप को गले से लगा लिया तो दोस्तों गरीबी और अमीरी से कोई फरक नहीं परता अगर इरादा पक्का हो तो असमान मे भी छेद हो सकता है| किसी ने खूब लिखा है|

कोन कहता है की असमान में छेद नहीं हो सकता है| अरे एक पथर तो तबीयत से उछालो यारो|

एक दिन बेटी माँ से बोली की माँ तुमने मुझे आज तक नहीं बतया की तुमने मेरे हाईस्कूल की फीस के पेसे कहा से लायी थी बेटी के बार बार पूछने पर माँ ने जो बात बताई थी उसे सुन कर बेटी की रूह काप गयी, कियु की माँ ने अपने खून बेच कर बेटी का एडमिशन कराया था|

दोस्तों तभी तो माँ को भगवान का दर्जा दिया गया है एक माँ जितना अपनी औलाद के लिए तियाग कर सकती है उतना दुनिया में और कोई नहीं कर सकता

बेटियाँ हमारे लिए कितनी जरुरी है
बेटियाँ हमारे लिए कितनी जरुरी है

How important daughter’s poem

गोदी में मुझ को सुलाया है माँ ने| बढे प्यार से अपनी मीठी जुबा से बेटा कह कर बुलाया है माँ ने |मुझ को लेकर अपनी गरम बाजुओ में मोह्बात का जूल्हा जूल्हाया है माँ ने सभी जखम अपने सीने में लेकर हर चोट से बचाया है माँ ने| कभी मेरे माथे पर कला टिका लगा के यु बचपन में सझया है माँ ने| यु चहेरा दिखा कर मुझे अपना रोज मेरे रब से मिलाया है मेरी माँ ने| है इन्सान तू जो इतना इतर के चलता है इस काबिल बनाया है माँ ने|

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