Hindi Story of Akbar Birbal with Moral | हिंदी कहानियाँ सब के लिए

Hindi Story of Akbar Birbal with Moral: दोस्तों आप ने अकबर और बीरबल की बहुत सारी कहानियाँ  पढ़ी होगी | पर मैं आज आपको ऐसी ही कुछ कहानियाँ बताने जा रहा हूँ, जिसे पढ़ने के बाद आपको जरूर एक अच्छी शिक्षा मिलेंगी |

बीरबल और लालची दुकानदार

एक बार बीरबल को शहर के लोगों ने आकर एक लालची बर्तन के दुकानदार के बारे में शिकायत की कि वह बहुत लालची हैं, उसे सबक सिखाओ |

Hindi Story of Akbar Birbal with Moral

यह सुनकर बीरबल दुकानदार के पास गए और वहाँ से तीन बड़े-बड़े पीतल खरीद  लाए | कुछ दिन के बाद वह एक बहुत छोटी सी पतीली लेकर लालची दुकानदार के पास पहुंचे और बोले, यहाँ आपके बड़े ने बच्चा दिया, कृपया इसे रख लें | दूकानदार बहुत खुश हुआ और ख़ुशी-ख़ुशी छोटी पतीली ले ली |

कुछ दिन के बाद बीरबल एक बड़ा पतीली लेकर दुकानदार के पास गए और बोले, ” मुझे यह पतीली पसंद नहीं आई, आप मेरे पैसे मुझे वापस कर दीजिये |

दुकानदार बोला, ” लेकिन यह तो सिर्फ एक ही है, जबकि मैने तुम्हे तीन पतीली दिए थे |

तब बीरबल ने कहाँ दो पतीलों की मृत्यु हो गई है, दुकानदार ने जवाब दिया जाओ-जाओ क्यों बेवकुफ बनाते हो ? kiya पीतल पतीलों कि मृत्यु होती हैं ?

तब बीरबल ने जवाब दिया, “क्यों नहीं, जब पतीलों के बच्चें पैदा हो सकते है, तो मृत्यु भी हो सकती हैं | और दुकानदार को बीरबल के पैसे वापस करने पड़े | और दुकानदार को शेर का सवा शेर भी मिल गया |

गधा कौन ?

एक बार अकबर अपने दो बेटों के साथ नदी के किनारे गए, साथ में बीरबल भी थे, दोनों ने अपने कपड़े खोलें और नदी में नहाने उतर गए, बीरबल को उन्होंने अपने कपड़ो की रखवाली करने के लिए कहा |

बीरबल नदी किनारे बैठ कर उन दोनों के आने का इंतज़ार करने लगें, कपड़ें उन्होंने अपने कन्धों पर रखे हुए थे | बीरबल को इस अवस्था में खड़े देख अकबर के मन में शरारत सूझी, उन्होंने बीरबल को कहा, बीरबल तुम्हे देख कर ऐसा लग रहा हैं जैसे धोबी का गधा कपड़े लाद कर खड़ा हो |

बीरबल ने झट से जवाब दिया, महराज धोबी के गधे के पास केवल एक गधे का ही बोझ होता है | किंतु मेरे पास तो तीन-तीन गधों का बोझ हैं, महराज अकबर निरुत्तर हो गए |

अकबर बीरबल को नोकझोंक

एक बार बीरबल को दरबार में आने में देर हो गई | जब वह आए तो अकबर ने उनसे पूछा बीरबल ! आज आने में तुम्हें देर कैसे हो हुई ?

हम कब से तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं | हमें तुमसे एक खास सवाल करना हैं | बीरबल ने कहा, जहाँपना ! रोज-रोज आप ही मुझसे सवाल पूछते हैं, यह तो बड़ा अन्याय हैं |

आज मुझे आप से एक सवाल पूछना हैं | यदि आप अनुमति दें, तो में आपसे प्र्सन पूंछू ?

ठीक है आज तुम हमसे प्र्सन पूछो , हम तुम्हें जवाब देंगे | “जहाँपना ! सूर्य रोज पूर्व दिशा में ही क्यों उगता हैं ? बीरबल ने पूछा |

अरे यह भी कोई प्र्सन हैं ? किसी मूर्ख को भी इस प्र्सन का जवाब पाता होगा ?

बीरबल से उनसे ऐसे ही जवाब की अपेक्षा थीं | तुरंत ही उन्होंने सर झुकाकर कहा, श्रीमान इसलिए तो मेंने आपसे यह प्र्सन पूछा |

बादशाह पहले तो कुछ समझे नहीं, पर दरबारियों को खामोश बैठे देख वह सब समज गए | वह ठठाकर हंस पड़े | फिर दरबारी भी खिलखिलाकर हॅसने लगे | बीरबल के जाल में बादशाह पूरी तरह फंस गए | बात को हंसकर टालने के अलावा उनके पास कोई चरा नहीं था |

 

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