कुछ परिवर्तन जीवन के जो दर्द देते है || Few changes give pain in live

कुछ परिवर्तन जीवन के जो दर्द देते है || Few changes give pain in live

कुछ परिवर्तन जीवन के जो दर्द देते है

 पहला परिवर्तन: सदियों पहले ऐसा होता था की घर की औरते घर में खाना पकाने का काम करती थी और नाचने वाली बहार से आया करती थी, पर अब समय इतना बदल गया है की खाना पकाने वाले बहार से आती है और घर की औरते नाचती है|

दूसरा परिवर्तन: पहले लोग घर के दरवाजे पर एक आदमी तेनाथ करते थे की कोई कुत्ता ना घर में घुस जाये पर आज कल लोग घर के दरवाजे पर कुत्ता तेनाथ करते है की कोई आदमी ना घर में घुस जाये |

तीसरा परिवर्तन:  पहले आदमी घर में खाना खाता था और लेट्रींग घर के बहार करने जाता था पर अब इंसान खाना खाने बहार जाता है और लेट्रींग करने घर के अन्दर जाता है|

चोथा परवर्तन:  पहले गरीब साइकिल चलता था और और वो फिट रहता था अब आदमी कार से जिम जाता है साइकिल चलने के लिए |

चारो जीवन के जरुरी परिवर्तन है| वह रे मानव तेरा सुभाव लाश को हाथ लगता है तो नहाता है और बेजुवान जीव को मार कर खाता है| यह मंदिर माजिद भी किया गजब की जगह है दोस्तों जहा गरीब बहार और अमीर अन्दर भीख मांगता है| विचित्र दुनिया का करवा सत्य बारता में दूल्हा सबसे पीचे और दुनिया सबसे आगे चलती है पर मयात में या जनाजा आगे और दुनिया पीचे चलती है | यानी दुनिया ख़ुशी में आगे और दुख में पीचे हो जाती है अजब तेरी दुनिया घजब तेरा ख्याल |





मोमबती जला कर कबर में मुर्दों को याद करना और मोमबती जला कर जन्मदिन मानना लाइन छोटी है पर मतलब बहुत बड़ा है | उम्र भर उठाया भोज उस कील ने और लोग तारीफ तस्वीर की करते है| पायल हजारो रुपयों में आती है पर पांव पे पहनी जाती है और माथे की Bhindi एक रूपये की आती है और माथे पर लगयी जाती  है तो इस लिए मित्रों कहते है न कीमत मायने नहीं रखती है उसका स्वभाव और स्थान मायने रखता है| एक किताब घर में राखी गीत और कुर्रान कभी नहीं लड़ते और जो उन के लिए लड़ते है वो कभी उन दोनों को नहीं पढ़ते |

नमक की तरह करवा ज्ञान देने वाले ही सचा मित्र होता है मीठी बात करने वाले तो चापलूस भी होते है दुनिया घवाह है| कभी नामक में कीढे नहीं पडे पर अक्सर मीठे में अक्सर कीढे पर जाते है| अच्छे मार्ग पर कोई जाता पर बुरे मार्ग पर हर कोई जाता है इसलिए दारू बेचने वाला कही नहीं जाता पर दूध बेचने वाले को घर घर जाना पढ़ता है और दूध वाले से बार बार पूछा जाता है पानी तो नहीं डाला और दारू में खुद पानी मीला मीला कर पीते है|

निष्कर्ष

इंसान की समज बस इतनी सी है की अगर उसे जानवर कहो तो नाराज हो जाता है पर अगर आप उसे शेर कहेंगे तो वह खुश हो जायेगा पर उसमे इतनी समज नहीं है की शेर भी तो एक जानवर है|

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