भोले-भाले लोगो को भगवन जल्दी मिल जाते है| Motivational story

भोले-भाले लोगो को भगवन जल्दी मिल जाते है| Motivational story

भोले-भाले लोगो को भगवन जल्दी मिल जाते है| Motivational story

भोले भाले इंसान की कहानी: एक समय की बात है एक सत्संग चल रहा था | और वह पर एक सीधा सदा आदमी चला आया और कहने लगा हे गुरुदेव मुझे कुछ सेवा बक्शो उस जमाने में मुगलों से युध होते रहते थे?

तब गुरु ने पूछा तुजे बन्दुक चलानी आती है ?  उसने कहा नहीं, फिर गुरु ने पूछा तुझे घोरसवारी करनी आती है ? उसने कहा नहीं, फिर गुरु ने पूछा फिर तू किया करेगा ? फिर उसने कहा में घोरों की सेवा करूँगा फिर गुरु ने उसे घोरों की सेवा में लगा दिया |

और वह भोला इन्सान बहुत प्रेंम से घोरों की सेवा करने लगा, घोरों की लीघ बहार फेकता साफ सूत्री घास डालता हर परकर की सफाई करता, दो तीन महीने में घोरे बहुत मोटे तगड़े हो गए,  फिर एक दिन गुरु साहेब ने आकार देखा की घोरे बहुत तगड़े हो गए है |




ये देख कर उन्होंने अस्तबाल के मुखिया से पूछा की घरों की इतनी सेवा किसने की है| फिर मुखिया ने गुरु को बताया की ये सेवा भाई भेला जी ने की है, फिर गुरुजी ने भेला जी से पूछा की तेरा नाम किया है | वह बोला भेला तो फिर गुरुजी कहने लगे भेला आप कुछ पढ़े लिखे भी हो ? तो फिर उसने उत्तर दिया की कुछ नहीं, तो फिर गुरूजी ने कहा अच्छा, तुझे हम पढ़ा लिखा  देंगे, गुरुजी ने कहा तू यही पढ़ा भी करना साथ साथ सेवा भी किया करना फिर गुरूजी उसे रोज एक पंक्ति बता देते वह उसे याद करता रहता|

फिर एक दिन गुरूजी मुगलों के साथ लड़ाई के लिए जा रहे थे, भेला वहा दोर कर आया और बोला मुझे आज के लिए तो एक तुक दे जाओ , तुक मतलब एक लाइन दे जाओ जो में याद करलु उन्होंने कहा वक़्त नहीं दिखता हम कही जा रहे है , “वह भाई भेला ना दिखता वक़्त न ही देखती कोई भेला ?” भेला ने समजा गुरुजी मुझे कोई पंक्ति बता गये हैं?

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अब भेला दिन भर उस पंक्ति को याद करता रहा, वह भाई भेला ना दिखता वक़्त न ही देखती कोई भेला, अब वाह के सभी सेवादार ये सब देख कर हसने लगे की ये बेवकूफ़ किया बोलता फिर रहा है, फिर शाम को जब वो लोग गुरूजी से पूछते है | की किया आज कोई पंक्ति भेला को बता कर गए थे ? तो फिर गुरूजी बोले कोई नहीं फिर उन्होंने बताया की वो तो पूरे दिन भर बस यही रटता रहा वह भाई भेला ना दिखता वक़्त न ही देखती कोई भेला ? तो इस का मतलब यहाँ था की गुरूजी यहाँ बोल रहे थे की तुमे वक़्त भी नहीं देखते है|  कोई कही जा रहा है किसी काम से और तुम उस से अपना काम लेना चाहते हो या कोई पंक्ति लेना चाहते हो|

गुरूजी ने हंस कर कहा जिसने वक़्त नहीं पहचाना वहा समझ गया और वह पार हो गया, जो गुरूजी ने ये वचन फरमाये उसकी सूरत उपरी मंडलों पर चर गयी अब सारा दिन प्रेम से तुक रटता रहता था, अगर सूरत अन्दर जाती तो नाम के रंग में रंगा रहता और अगर बहार रहता तो गुरूजी के नाम और ख्यालों में डूबा रहता था |



ये सब देख कर कुछ सेवा दार ने कहा की इस दरबार में कोई नियाए नहीं है | और बोले हम कब से सेवा करते अये है और कुछ प्राप्त नहीं हुआ और इसे कुछ ही दिन हुए है आए हुए और ये गुरुजी के नाम में रंग गया, उस ज़माने में कुछ सेवा दार गरंथ पुराणों का अनुवाद भी कर रहे थे कहने लगे कहा हमने पुराणों का अनुवाद किया सेवा की लेकिन किया ये सब बेकार है?

वो सब सेवादर क्रोध से भर गए की अब यहाँ रहना ही नहीं चाहिये गुरुजी ने ये सब देखा की वो क्रोध में आ गए है तब गुरूजी ने कुछ भांग देखी और कहा इसे खूब कुटो कियुं की भांग का नासा तब ज्यादा चरता है जब भांग अच्छी तरह से कुट्टी हुई हो, अब कहा इसे प्रेम के साथ बनाओ अब भांग का घड़ा तयार हो गया तब गुरूजी वह पर अये और बोले इसे पियो और खुला करते जाओ जब सरा घरा खाली हो गया तब गुरुजी ने पूछा की नशा आया तब उन सेवादरो ने कहा नहीं आया, नशा तो तब आता न जब पीकर अन्दर जाता हमतो कुली कर रहे थे, तब गुरूजी ने बोला भेला वाले सवाल का जवाब यही है |

उसके अन्दर नाम का नशा चर गया है मतलब तो यही है की जब तक अन्दर प्यार न हो तो मुख्ती तो नहीं है | पर्दा नहीं खुलता है सांति नहीं आती है, तो कहना का मतलब यहाँ है की गुरूजी ने तो वैसे ही प्यार से बोला था पर भेला भाई में इतना प्यार था,  गुरूजी के लिए या इतना यकीन था, यु कहे तो इतने भोले थे की उस बात का मतलब वो समझ नहीं पाए और वह समजे की आज का मेरा जो तुक है, वो ये ही है जो गुरुजी ने जाते समय बोल कर गए, तब वो पुरे दिन भर उसी को रटता रहा ऐसे में वही उसका ध्यान बन गया और जो उसकी सूरत थी वह ऊपर वाले मंडलों में चले गयी, और वो लोग जो सालो से किताब पढ़ रहे थे, ग्रन्थ पढ़ रहे थे वो लोग वह तक नहीं पहुँच पाए थे |

इसमें गुरुजी की कोई कसूर नहीं है था ये तो अन्दर का आपका प्यार है, अन्दर की अपनी वीरा है, की आप कितने प्यार से उस भगवान की भक्ति करते है, और कितने प्यार से उसका कहा मानते है| तभी कहा जाता है की भोले भाले इंसान को भगवान जल्दी मिल जाते है|

Conclusion- निष्कर्ष

तो दोस्तों हमे इस कहानी से यहाँ शिक्षा मिलती है | की हमे अपने इश्वर में भवाना होनी चयिए हमे  कैसे उनका हुकम माना चाइये, तो कहते है ना जो लोग नीचे रहते है और जिस पेड़ जुक कर ही होते है उनमे ही फल लगते है, कहने का मतलब यहाँ है की जिन लोगो के मन में परात्मा के परती प्रेम है दिल से वही लोग परात्मा तक पूछते है सबसे पहले.

 

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