ये 5 heart Touching Stories in Hindi for men एक बार जर्रूर पढ़े

ये 3 heart Touching Stories in Hindi for men एक बार जर्रूर पढ़े

दो चिड़ियों की प्रेम कहानी 

5 heart Touching Stories in Hindi for men

Heart Touching Stories in Hindi: एक दिन महिला चिडियाँ ने परुष चिड़याँ से बोला की मुझे छोड़ कर कही तुम उड़ तो नहीं जाओगे, पुरुष चिड़याँ बोला उड़ जाँऊगा तो तुम पकड़ लेना मुझे, महिला चिड़याँ बोली में तुम पकड़ तो सकती हूँ , पर फिर कभी तुमको पा नहीं सकती |

यह बात सुन कर परुष चिड़याँ के आँखों में आँसू आ गए, और फिर उसने अपने पंख तोर दिए और बोला अब हम और तुम हमेशा साथ साथ रहेंगे |

एक दिन जोर से तूफ़ान आने वाला था तो महिला चिड़याँ उड़ने लगी, तभी परुष चिड़याँ ने कहा तुम उड़ जाओ में नहीं उड़ सकता, तभी महिला चिड़िया ने पुरुष से कहा की, ख्याल रखना ये कह क्र वो उड़ गई…

जब तूफान थमा तो महिला चिड़िया वापिस उस पेड़ पे आयी तो देखा की परुष चिड़याँ मर चुकी थीं और एक डाली पर लिखा था काश वो एक बार कह देती की में तुम नहीं छोर सकती, तो शायद मैं तूफान आने से पहले नहीं मरता |

तो दोस्तों इस कहानी से हमे ये शिक्षा मिलती है | जब हम किसी से सच्च्चा प्यार करते है तो इतना टूट जाते है की हमे जीना मरने से कोई फर्क नहीं पढ़ता अगर हमारे पत्नीर ने हमे छोर दिया हो |

अजनबी मुसाफिर की कहानी

वो  ट्रेन के रेजेर्वेशन के डिब्बे में बाथरूम के तरफ वाली एक्स्ट्रा सीट पर एक लड़की बैठी थी… इसके चेहरे से पता चल रहा था कि थोड़ी सी घबराहट है उसके दिल में की कहीं टी-टी ने आकर पकड़ लिया तो |

कुछ देर तक तो पीछे पलट-पलट कर टी-टी के आने का इंतजार करती रही | सयाद सोच रही थी की थोड़े बहुत पैसे देकर कुछ निपटारा कर लेगी | देखकर लग रहा था की जरनल डिब्बे में चढ़ नहीं पाई इसलिए इसमें आकर बैठ गयी, शायद ज्यादा लम्बा सफर भी नहीं करना होगा |

सामान के नाम पर उसके गोद में रखा एक छोटा सा बेग़ दिख रहा था |  मैं बहुत देर तक कोशिश करता रहा पीछे से उसे देखने की कि शायद चेहरा सही से दिख पाए लेकिन हर बार असफलता ही रहा |

फिर थोड़ी देर बाद वो भी खिड़की पर हाथ ठीककर सो गयी | और मैं भी वापस से अपनी किताब पढ़ने में लग गया | लगभग 1 घंटे के बाद  टी-टी आया और उसे हिलाकर उठया |

“कहाँ जाना हैं बेटा “

“अंकल अहमदनगर तक जाना है “

टिकट  है ? 

“नहीं अंकल। … जरनल का हैं “

लेकिन वहाँ चढ़ नहीं पाई इसलिए इसमें बैठ गयी, अच्छा तीन सौ रुपए की पेनल्टी लगेंगी |

ओह अंकल मेरे पास तो लेकिन 100 रुपये ही हैं , ये तो गलत बात है बैटा , पेनल्टी तो भरनी पड़ेगी |

सॉरी अंकल। .. में नेक्स्ट स्टेशन में जरनल में चली जाऊंगी। मेरे पास सच्च में पैसे नहीं हैं कुछ परेशानी आ गयी इस लिए जल्दबाजी में घर से निकल गई |

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और ज्यादा पैसे रखना भूल गयी। …. बोलते-बोलते वो लड़की रोने लगी टी-टी उसे उसे माफ़ किया और 100 रुपये में उसे अहमदनगर तक बैठने की परमिशन देदी |

टी-टी के जाते ही उसने अपने आँसू पोछें और इधर-उधर देखा कि कहीं उसकी और देखकर कोई हंस तो नहीं रहा हैं | थोड़ी देर बाद उसने फ़ोन लगाया और कहा कि उसके पास बिलकुल भी पैसे नहीं बच्चे हैं | अहमदाबाद स्टेशन पर कोई जुगाड़ करके उसके लिए पैसे भिजा दे, वरना वो समय पे गाँव नहीं पहुँच पायेगी |

मेरे मन में उथल-पुथल हो रही थी, न जाने उसकी मासूमियत देखकर उसकी तरफ खिंचाव सा महसूस कर रहा था | दिल कर रहा था उसे पैसे देदू और कहुँ कि तुम परेशान मत हो। … और रो मत लेकिन एक अजनबी के लिए इस तरह कि बात सोचना थोड़ा अजीब था |




उसकी शक्ल से लग रहा था की उसने कुछ खाया पिया नहीं है, श्याद सुबह से और अब उसके पास पैसे भी नहीं थे | बहुत देर तक उसे परेशानी में देख कर मैं कुछ उपाय निकलने लगा जिससे मैं उसकी मदद कर सकूँ और फ्लर्ट भी ना कहलाऊ | फिर मैं एक पेपर पर नोट लिखा |

बहुत देर से तुम्हे परेशान होते हुए देख रहा हूँ, जनता हूँ कि एक अजनबी हम उम्र लड़के का इस तरह तुम्हे नोट भेजना अजीब भी होगा और शायद तुम्हारी नजर में गलत भी, लेकिन तुम इस तरह परेशान देख कर मुझे बैचेनी हो रही हैं, इस लिए यह 500 रुपये तुम दे रहा हूँ, तुम्हें कोई अहसान न लगे इसलिए मेरा एड्रेस भी लिखा रहा हूँ। … जब तुम्हें सही लगे मेरे एड्रेस पर पैसे वापस भेज सकती हो। .. वैसे मैं नहीं चाहूंगा कि तुम वापस करो अजनबी हमसफ़र |

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एक चाय वाले के हाथों उसे वो नोट देने को कहा, और चाय वाले को माना किया कि उसे ना बातये कि वो नोट मैंने उसे भेजा हैं | नोट मिलते ही उसने दो – तीन बार पीछे पलटकर देखा कि कोई उसकी तरफ देखता हुआ नज़र आये टी उसे पता लग जायेगा की किसने भेजा हैं |

लेकिन में तो नोट भेजने के बाद ही मुँह पे चादर डालकर लेट गया था | थोड़ी देर बाद चादर का कोना हटाकर देखा तो उसके चेहरे में मुस्कान थीं | लगा जैसे कई सालो से इस एक मुस्कराहट का इंतजार था |

उसकी आँखों की चमक ने मेरा दिल उसके हाथो में जाकर थमा दिया | फिर चादर का कोना हटा -हटा कर हर थोड़ी देर में उसे देखकर जैसे सांस ले रहा था मैं | पता ही नहीं चला कब ऑंख लग गयी | जब आँख खुली तो वो वहाँ नहीं थीं |

ट्रेन अहमदाबाद स्टेशन पर ही रुकी थी | और उस सीट पर एक छोटा सा नोट रखा था  | मैं झटपट मेरी सीट से उतरकर उसे उठा लिया और उस पर लिखा था। ……. Thanks You मेरे अजनबी हमसफ़र …..

आपका ये अहसान मैं ज़िन्दगी भर नहीं भूलूँगी मेरी माँ आज मुझे मुझे छोड़कर चली गयी हैं ….. घर में मेरे आलावा कोई नहीं हैं इसलिए आनन – फानन में घर जा रही हूँ |

आज आपके इन पैसों से मैं अपनी माँ को श्मशान जाने से पहले एक बार देख पाऊँगी।।।

उनकी बीमारी की वजह से उनकी मौत के बाद उन्हें ज्यादा देर तक घर में नहीं रखा जा सकता | आज से मैं आप की कर्जदार हूँ जल्द ही आपके पैसे लौटा दूंगी |

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उस दिन से उसकी वो आँखे और वो मुस्कुरहट जैसे मेरे जीने की वजह थे ….. हर रोज पोस्टमेन से पूछता था शायद किसी दिन उसका खत आ जाये | आज एक साल बाद उसका खत मिला लेकिन आपका कर्ज अदा करना चाहती हूँ …..

लेकिन खत के ज़रिये नहीं आपसे मिलकर निचे मिलने की जगह का पता लिखा था और आखरी मैं लिखा था.. अजनबी हमसफ़र |

माँ 

कुछ समय पहले जापान में आये सुनामी के दौरन एक दिल को छू लेने वाली घटना हुई… भूंकप के बाद बचाव कार्य का एक दल एक महिला के पुर्ण रूप से ध्वस्त हुए घर की जाँच कर रहा था | बारीक़ दरारों से महिला का मृत शरीर दिखा, लेकिन वो एक अजीब अवस्था में था, महिला अपने घुटनों के बल बैठी थी ठीक वैसे ही जैसे जैसे मंदिर में लोग भगवान के सामने नमन करते हैं |

उसके दोनों हाथ किसी चीज़ को पकड़ हुए थे और भूकंप से उस महिला की पीठ और सर को काफी क्षति पहुंची थीं | काफी मेहनत के बाद दल के सदस्यों ने बारीक़ दरारों में कुछ जगह बनाकर अपना हाथ महिला की तरफ बढ़ाया, बचाव दल  उम्मीद थी कि शयद महिला जिन्दा हो, लेकिन महिला का शरीर ठंडा हो चूका था और बचाव दल समज गया की महिला मर चुकी हैं |

बचाव दल उस घर को छोड़ दूसरे मकानों की और चल पड़ा, बचाव दल के प्रमुख का कहना था कि, पता नहीं उस महिला का घर मुझे अपनी तरफ खीच रहा रहा था, कुछ तो था जो कह रहा था की मै इस घर को ऐसे छोड़ के ना जाऊ और मैने अपने दिल की बात माने का फैसला लिया | उसके बाद बचाव दाल एक बार फिर उस महिला  घर की तरफ पहुँचा |

दल प्रमुख ने मलबे को सावधानी से हटा कर बारीक़ दरारों में से अपना हाथ महिला की तरफ बढ़ाया महिला के शरीर के निचे की जगह को हाथों से टटोलने लगा, तभी उनके मुँह से निकला, बच्चा यहाँ एक बच्चा हैं |

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अब पूरा दल काम में जुट गया सावदानी से मलबा हटाया जाने लगा तब उन्हें महिला के मृत शरीर के निचे एक टोकरी में रेशमी कम्बल में लिपटा हुआ 3 माह का एक बच्चा मिला दाल को समाझ में आ चूका था कि महिला ने अपने बच्चे को बचने के लिए अपने जीवन का त्याग किया हैं |

भूकंप के दौरान जब घर गिरने वाला था तब उस महिला ने अपने बच्चे की रक्षा की थी, डॉक्टर भी जल्द ही वहां आ पहुंचे दल ने जब बच्चा उठया तब बच्चा बेहोश था |

बचाव दल ने बच्चे का कम्बल हटाया तब उन्हें वहाँ एक मोबाइल मिला, जिसकी स्क्रीन पर सन्देश लिखा था, मेरे बच्चे अगर तुम बच गए तो बस इतना याद रखना कि तुम्हारी माँ तुमसे बहुत प्यार करती थीं |

मोबाइल बचाव दल में एक हाथ से दूसरे हाथ जाने लगा, सभी ने वो संदेश पढ़ा, सबकी आँख नम हो गयी… दोस्तों अगर ये heart Touching Stories in Hindi for men कहनी अच्छी लगे तो हमे जरूर शेयर करें | 

माँ और बेटा

बेटा: हैलो माँ में तुम्हारा बेटा बोल रहा हूँ |  कैसी हो माँ ?

माँ : में….  में…. ठीक हूँ बेटा …. ….  यह बताओ तुम और बहु दोनों कैसे हो ?

बेटा : माँ हम दोनों ठीक है ….  माँ आप की बहुत याद आती है ?  अच्छा सुनो माँ, में अगले महीने इंडिया आ रहा हूँ ….  तुम्हे लेने ….

माँ : किया ?

बेटा: हां माँ ….  अब हम सब साथ में रहेंगे तुम्हारी बहू कह रही थीं ….  माँ को अमेरिका ले आओ, वहाँ वो अकेली बहुत परेशान हो रही होगी ….  हेल्लो  ….  सुन रही हो ना माँ ?

माँ :: हाँ …. हाँ बेटे ….

माँ की आँख से आँसू बहने लगी ….  बेटे और बहू का प्यार नस नस में दौडने लगा |

पुरे 5 साल बाद घर आने वाला था |




बेटा अकेला आया था ….

बेटा….  माँ हमे जल्दी ही वापिस जाना हैं | इसलिए जो भी पैसा किसी से लेना हैं वो लेकर रख लो, और तब तक में किसी प्रॉपटी डीलर से माकन की बात करता हूँ |

माँ : माकन

बेटा : माँ तुम यह बैठो में अंदर जाकर सामान को चेक और बोर्डिंग वीसा का काम निपटा कर आता हूँ |

माँ : ठीक है बेटे ….

काफी समय बीत गया ….  एयरपोर्ट कर्मचारी : माजी …. किस से मिलना हैं ….

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माँ: मेरा बेटा अंदर टिकट लेने गया हैं। हम आज अमेरिका जा रहे हैं |  एयरपोर्ट कर्मचारी : लेकिन अंदर तो कोई भी नहीं है, अमेरिका जाने वाली सभी फ्लाइट दोपहर में ही चली गयी |

कर्मचारी अंदर गया और कुछ देर बाद बहार आ कर बोला, कर्मचारी: माजी आपका बेटा तो अमेरिका जाने वाली फ्लाइट से कब का जा चूका है। … बूढी माँ के आँख से आँसू आ गए |

किसी तरह वो वापिस घर पहुंची, जो की अब बिक चुका था, रात में वो घर के बहार एक रोड के फुटपाथ पर ही सो गयी सुबह हुई तो एक दयालु माकन मालिक ने एक कमरा रहने को दे दिया |

पति की पेंसन से घर का किराया और खाने का काम चलने लगा समय गुजरने लगा | ……एक दिन

माकन मालिक | माजी  आप अपने किसी रिश्तेदार के यहाँ चली जाए  |  अब आप की उम्र बहुत हो चुकी हैं अकेली कब तक रह पाओगी |

माँ : हाँ, चली तो जाऊ, लेकिन कल को मेरा बेटा आया तो …? यहाँ फिर कौन उसका ख्याल रखेगा ?

इतना कह कर उसकी आँख से आँसू छलकने लगे |

जोहरी ( हीरे की परख )

किसी शहर में एक जौहरी रहता था | उसका भरा -पूरा परिवार था | एक दिन अचानक दिल का दौरा पड़ने  कारण उसका निधन हो गया | 

उसने निधन के बाद परिवार संकट में पड़ गया | हालांकि पत्नी ने बुरे दिनों के लिए कुछ रूपये -पैसा बचा कर रखे थे | पर भला वे कितना दिन तक चलते ? इसलिए उनके खाने के लाले पड़ गए |

जोहरी की पत्नी के पास एक नीलम का हार था | उसने अपने बेटे को वह हार देकर कहा – बेटा, इसे अपने चाचा की दूकान पर ले जाओ | कहना इसे बेचकर रूपये दे दें , जिससे परिवार का खर्च चल सके |

बेटे ने हार को एक थले में रखा और उसे लेकर चाचा चौक उठे | वे उसे कुछ रूपये देते हुए बोले, बेटा, यह पैसे तुम रख लो | और जहॉ तक हार की बात है, इसे तुम वापस लेते जाओ | माँ से कहना अभी बाजार बहुत मंदा हैं |

फिर वे थोड़ा रूककर बोले, कल से तुम दूकान पर आ जाना | कुछ काम धंधा सीखोगे और दो-चार रूपये की आमदनी भी हो जाएगी | चाचाजी की बात सभी को अच्छी लगी |

अगले दिन से लड़का दुकान पर जाने लगा और चाचा के साथ रह जौहरी का काम सीखने लगा | देखते देखते काफी समय बीता गया | एक दिन वह लड़का हीरे-जवाहरात  बड़ा पारखी बन गया |

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एक दिन मौका देखकर चाचा ने उससे कहा, बेटा तुम्हे याद होगा कि एक दिन तुम एक नीलम का हार बेचने के लिए लाए थे | उसे अपनी माँ से लेकर आना, आजकल बाजार बहुत तेज हैं |

उसके अच्छे दाम मिल जायेंगे |

लड़का जब शाम को अपने घर पहुंचा, तो नीलम का हार लड़के के हाथ में रखा, तो वह आचार्यचकित रह गया | वह हार नकली था | लेकिन इस बात ने उसे सोच में डाल दिया | अगर यहाँ हार नकली हैं, तो उस समय चाचाजी ने यह बात कियु नहीं बताई थी, जब वह उसे बेचने के लिए चाचाजी के पास लेकर  था ?

चाचाजी ने जब उसकी बात सुनी, तो वे बोले, बेटा, जब तुम पहली बार हार लेकर आये थे, तब मैने जनबुझकर इसे नकली नहीं बतया था | कियुकी उस समय तुम्हारे परिवार के बुरे दिन चल रहे थे | उस समय तुम हमारी बात पर यकीन नहीं करते |

तुम्हे लगता की हमारे बुरे दिन चल रहे हैं, तो चाचा भी हमे ठगने की सोच रहे है | इससे तुम्हारी नजरों में हम बेकार में बुरे बन जाते और हमारे संबंद खराब हो जाते |

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इसलिए मैने  मंदी बहाना करके हार बेचने से माना कर दिया था | आज जब तुम्हे रतनो की परख हो गयी है, तो तुम्हें खुद ही पाता चल गया की हार सचमुच नकली हैं |

दोस्तों ऐसा अक्सर हमारे साथ भी होता हैं | हम किसी भी घटना अथवा बात की गहराई को समझ नहीं पाते और लोगों  साथ अपने सम्बंद खराब क्र लेते हैं, जबकि उसके पीछे की वजह दूसरी होती हैं |

इसलिए जब भी कभी ऐसा अवसर आये | जिसे आपकी रिश्तेदारी प्रभवित हो रही हो, वहाँ तत्काल निर्णय ना ले | कियुकी हिरे की परख के लिए के लिए अनुभव का ज्ञान होना जरुरी हैं | हो सकता है बिना ज्ञान /अनुभव के आप कोई गलत निर्णय ले बैठे और उसकी वजह से आपको पूरी उम्र पछताना पड़े |

 

 

 

 

 

 

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